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ध्यान देने योग्य सावधानियां:

  • एनीमिया से पीड़ित रोगीयो और कमजोर व्यकति इस योग के दौरान सांस लेने और सांस निकालने  की गिनती को 4 -4 ही रखें। 4  गिनती में सांस का लेना तो 4 गिनती में ही सांस को बाहर छोरना है।
  • कुछ व्यकति समया काम होने के कारण सांस लेने और सांस निकालने का अनुपात 1:2 नहीं रखते। वे बहुत तेजी से और जल्दी-जल्दी सांस लेते और निकालते है। इससे आस पास हवा  में मौजूद धूल, धुआं, जीवाणु और वायरस, सांस नली में पहुंचकर कई प्रकार के संक्रमण को पैदा कर सकते है।​

योग के लाभ :

  • शांति प्रदान करके तनाव कम करता हे
  • आखो की रोशनी बढ़ाता है और रक्त संचालन सही रहता है।
  • अनिद्रा की समस्या में यह प्राणायाम लाभदायक है।
  • मस्तिष्क में होनी वाली समस्याओं को दूर करने में भी लाभदायक है।
  • फेफड़े मजबूत होते है।
  • सर्दी, जुकाम व दमा की बीमारियो को काफी हद तक दूर करता है।हृदय को  स्वस्थ रखता  है।

योग विधि :
 अनुलोम-विलोम योग करने के लिए एक शांत स्थान पर साधारण रूप से बैठ जाए फिर उसके बाद अपने दाएं हाथ के अगुठे से अपनी दाएं नाक का छिद्र को बंद करे और बाए छिद्र से  सांस को अंदर की और भरे और फिर उसको  अंगूठे के बगल वाली दो अंगुलियों से बंद कर दें।
उसके उपरान्त दाहिनी नाक  से अंगूठे को हटा दो और दायीं नाक  से सांस को बाहर निकालिये।
फिर  दायीं नाक  से ही सांस को 4 -5 की गिनती तक अंदर को भरे और दायीं नाक को बंद करके बायीं नाक खोलकर सांस को 8 -9 की गिनती में बाहर निकल लीजिये।
इस प्राणायाम को 5 से 15 मिनट तक कर रोजाना करे।

अनुलोम-विलोम Anulom Vilom