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योग विधि :

चक्रासन करने के लिए एक साफ़ फर्श पर पीठ के बल लेट जाएं। उसके बाद दोनों पैरों के बीच लगभग डेढ़ फुट की दूरी रखे और दोनों पैरों के तलवों व एड़ी को फर्श पर टिकाकर रखें। फिर दोनों हाथों को कोहनियों से मोड़कर हथेलियों को कंधे के पास फर्श पर इस तरह से लगाये कि उंगलियों का रुख पैरों की ओर रहे। उसके बाद दोनों हथेलियों व पैरों पर जोर देते हुए हाथों व पैरों के सहारे शरीर के बीच का हिस्सा धीरे-धीरे जितना हो सके उतना ऊपर उठाएं। इस तरह 15 से 20 सेकेंड तक रहें। फिर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में आ जाएं। 4 से 5 बार इस आसान का अभ्यास करना ही काफी लाभप्रद होता है।

योग के लाभ : 

  • रीढ़ की हड्डी को लचीला रख कर वृध्दावस्था नहीं आने देता ।
  •  जठर एवं आंतो को सक्रिय करता है ।
  • शरीर में स्फूर्ति, शक्ति एवं तेज की वृध्दि होती है।
  •  कटिपीड़ा, श्वास रोग, सिरदर्द, नेत्र विकारों, सर्वाइकल व स्पोंडोलाईटिस में विशेष लाभकारी है।
  • छाती चौड़ी, कमर पतली व लचीली करता है।
  • हाथ पैरों कि मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।
  •  महिलाओं के गर्भाशय के विकारों को भी दूर करता है।

ध्यान देने योग्य सावधानियां:

  • चक्रासन अन्य योग मुद्राओं की तुलना में अधिक कठिन  है। 
  •  ह्रदय रोगी उच्च रक्तचाप, हर्निया रोगी और अल्सरेटिव कोलैटिस के रोगी इस अभ्यास को मत करे।
  • महिलाओं को गर्भावस्था एवं मासिक धर्म के समय यह आसन नहीं करना चाहिए।

चक्रासन Wheel Pose

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