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ध्यान देने योग्य सावधानियां:

  • यह आसन रीढ़ संबंधी गंभीर रोग अथवा गले में कोई गंभीर रोग होने की स्थिति में न करें।

योग के लाभ : 

  • हलासन योग से रीढ़ लचीली बनती है।
  • हलासन योग से नाड़ियों के स्वास्थ्य की रक्षा कर वृद्धावस्था के लक्षण जल्दी नहीं आते।
  • हलासन योग के नियमित अभ्यास से अजीर्ण, कब्ज, अर्श, थायराइड का अल्प विकास, अंगविकार, असमय वृद्धत्व, दमा, कफ, रक्तविकार आदि दूर होते हैं।
  • हलासन योग से सिरदर्द दूर होता है।
  • हलासन योग से नाड़ीतंत्र शुद्ध बनता है।
  • हलासन योग से शरीर बलवान और तेजस्वी बनता है।

योग विधि :

इस आसन के लिए पहले पीठ के बल भूमि पर लेट जाएँ। फिर एड़ी-पंजे मिला लें। उसके बाद हाथों की हथेलियों को भूमि पर रखकर कोहनियों को कमर से सटाए रखें। फिर श्वास को सुविधानुसार बाहर निकाल दें। फिर उसके बाद दोनों पैरों को एक-दूसरे से सटाते हुए पहले 60 फिर 90 डिग्री के कोण तक एक साथ धीरे-धीरे भूमि से ऊपर उठाते हुए जाएँ। फिर घुटना सीधा रखते हुए पैर पूरे ऊपर 90 डिग्री के कोण में आकाश की ओर को उठाएँ। उसके बाद हथेलियों को भूमि पर दबाते हुए हथेलियों के सहारे पैरों को पीछे से सिर की ओर झुकाते हुए पंजों को भूमि पर रख दीजिये। फिर अब दोनों हाथों के पंजों की संधि कर सिर से लगाए। फिर उसके बाद सिर को हथेलियों से थोड़-सा दबाएँ, जिससे आपके पैर और पीछे की ओर जाएँ। इसे अपनी सुविधानुसार जितने समय तक रख सकते हैं रखें, फिर धीरे-धीरे इस स्थिति की अवधि को 2-5 तक बढ़ाएँ।

हलासन Plow Pose