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Sun Salutation - Total Health Yoga

सूर्य नमस्कार –  Surya Namaskar

7 भुजंग आसन (Cobra Pose)
इस आसन में आगे की ओर सरकते हुए, भुजंगासन में छाती को उठाएँ इसमे कुहनियाँ मुड़ी रह सकती हैं। कंधे कानों से दूर और दृष्टि ऊपर की ओर रखेंI
अगर आप चाहे तो ऐसे भी कर सकते है
श्वास लेते हुए छाती को आगे की तरफ धकेलने का सौम्य प्रयास करेंI तथा श्वास छोड़ते हुए नाभि को सहजता से नीचे की ओर दबाएँI पैरों की उंगलियों को भी नीचे की तरफ दबाएँ।उसके बाद यह सुनिश्चित करें कि जितना कर सकते हैं उतना ही करें, अपने साथ ज़बरदस्ती ना करें।

8 पर्वत आसन (Mountain Pose)
श्वास छोड़ते हुए कूल्हों और रीढ़ की हड्डी के निचले भाग को ऊपर उठाएँ, और छाती को नीचे झुकाकर एक उल्टे आकार में आ जाएँI
अगर आप चाहे तो ऐसे भी कर सकते है
संभव हो तो एड़ियों को ज़मीन पर ही रखें और रीढ़ के निचले भाग को ऊपर उठाने का प्रयास करेंI और खिंचाव को गहराता हुआ अनुभव करें।

9 अश्वसंचालन आसन (Equestrian Pose)
इस आसन में श्वास लेते हुए दाहिना पैर दोनों हाथों के बीच ले जाएँ, बाएँ घुटने को ज़मीन पर रख सकते हैंI और दृष्टि ऊपर की ओर रखेंI
अगर आप चाहे तो ऐसे भी कर सकते है
दाहिने पंजे को दोनो हाथों के बीच में रखें और दाहिनी पिंडली को ज़मीन के लंबवत रखेंई तथा कूल्हों को नीचे की तरफ ले जाने का प्रयास करें ताकि खिंचाव को गहराता हुआ अनुभव किया जा सकेI

10 हस्तपाद आसन (Hand to Foot Pose)
सांस छोड़ते हुए बाएँ पैर को आगे लाएँ, हथेलियों को ज़मीन पर ही रहने देंI उसके बाद अगर ज़रूरत हो तो घुटने मोड़ सकते हैं।

11 हस्तउत्थान आसन (Raised Arm Pose)
सांस लेते हुए रीढ़ की हड्डी को धीरे धीरे ऊपर लाएँ, हाथों को ऊपर और पीछे की ओर ले जाएँ, कुल्हों को आगे की तरफ धकेलें।

12 ताड़ासन (Tree Pose)
सूर्य नमस्कार की इस स्थिति को पहली स्थिति की भाँति करेंगे।

सावधानी :

  • कमर एवं रीढ़ के दोष वाले व्यक्ति यह योग न करें।
  • सूर्य नमस्कार की 3 व 5 स्थितियाँ सर्वाइकल एवं स्लिप डिस्क वाले रोगियों नहीं करना चाहिए हैं।
  • सूर्य नमस्कार चिकित्सक की सलाह से ही करें।

सूर्यनमस्कार के लाभ:

  • सूर्य नमस्कार से हड्डियां मजबूत होती हैं।
  • सूर्य नमस्कार से आँखों की रोशनी बढती है।
  • सूर्य नमस्कार से ब्लड प्रेशर की बीमारी में आराम मिलता है।
  • सूर्य नमस्कार से पेट की चर्बी काम होती हे जिसे मोटापा काम होता है
  • सूर्य नमस्कार से बाल सफेद होने झड़ने व रूसी से बचाता है।
  • सूर्य नमस्कार क्रोध पर काबू रखने में मददगार होता है।
  • सूर्य नमस्कार से कमर लचीली होती है।
  • सूर्य नमस्कार से हृदय व फेफडोंकी कार्यक्षमता बढती है।

1 प्रणाम आसन (Prayer Pose)
एक स्थान खड़े हो जाएँ, फिर अपने दोनों पंजे एक साथ जोड़ लीजिये और पूरा वजन दोनों पैरों पर समान रूप से डालिए। फिर उसके बाद छाती फुलाएँ और कंधे ढीले रखिये और सास लेते हुए दोनों हाथ बगल से ऊपर उठाएँ और सास छोड़ते हुए हथेलियों को जोड़ते हुए छाती के सामने प्रणाम की मुद्रा में ले आएँ I

2 हस्तउत्थान आसन (Raised Arm Pose)
इस योग में सास लेते हुए हाथों को ऊपर की ओर उठाएँ और पीछे ले जाएँ तथा बाजुओं की द्विशिर पेशियों (बाइसेप्स) को कानों के समीप रखिये I उसके बाद इस योग में पूरे शरीर को एड़ियों से लेकर हाथों की उंगलियों तक सभी अंगों को ऊपर की तरफ खींचने का प्रयास करिये।

3 हस्तपाद आसन (Hand To Foot Pose)
इस योग में सास छोड़ते हुए व रीढ़ की हड्डी सीधी रखते हुए कमर से आगे झुकिये। और उसके बाद पूरी तरह सास छोड़ते हुए दोनों हाथों को पंजो के समीप ज़मीन पर रखिये I और हो सके तो हथेलियों को ज़मीन तक लाने में अगर ज़रूरत हो तो घुटने मोड़ सकते हैं, अब घुटनों को सीधा करने का एक साधारण प्रयास करिये। उसके बाद अब से लेकर जब तक सूर्य नमस्कार का यह क्रम पूरा नहीं हो जाता, अपने हाथों की इस स्थिति को इसी स्थान पर स्थिर रखें I

4 अश्व संचालन आसन  (Equestrian Pose)
इस योग में सास लेते हुए जितना संभव हो दाहिना पैर पीछे ले जाएँ, और दाहिने घुटने को ज़मीन पर रखिये , दृष्टि को ऊपर की ओर ले जाएँ

5 डंडआसन (Stick Pose)
इस योग में सास लेते हुए जितना संभव हो दाहिना पैर भी पीछे ले जाएँ, और दाहिने घुटने को ज़मीन पर रखिये , दृष्टि को ऊपर की ओर ले जाएँ

6 अष्टांग नमस्कार (Salute With Eight Parts Or Points)
इस योग में आराम से दोनों घुटने ज़मीन पर लाएँ और सास छोड़े I और अपने कूल्हों को पीछे उपर की ओर उठाएँ I फिर उसके बाद पूरे शरीर को आगे की ओर खिसका कर अपनी छाती और ठुड्डी को ज़मीन से छुएँ और अपने कुल्हों को थोड़ा उठा कर ही रखेंI फिर उसके अब दो हाथ, दो पैर, दो घुटने, छाती और ठुड्डी (शरीर के आठ अंग ) ज़मीन को छूते हुए होंगेI

सूर्य नमस्कार, योगासनों में सबसे श्रेष्ठ योगासन के रूप में जाना जाता है। इस अकेले अभ्यास ही साधक को सम्पूर्ण योग व्यायाम का लाभ मिल जाता है। सूर्य नमस्कार के अभ्यास से साधक का शरीर निरोग और स्वस्थ हो जाता है। सूर्य नमस्कार में मंत्रों का उच्चारण किया जाता हैं और प्रत्येक मंत्र में सूर्य का अलग-अलग नाम लिए जाते हैं। सूर्य नमस्कार, स्त्री, पुरुष, बच्चे, युवा तथा वृद्धों सभी के लिए उपयोगी है, सूर्य नमस्कार को करने की विधि इस प्रकार से हैं।

सूर्य नमस्कार 13 बार करना चाहिये और प्रत्येक बार सूर्य मंत्रो के उच्चारण से लाभ होता है, वे सूर्य मंत्र इस प्रकार है-
1. ॐ मित्राय नमः, 2. ॐ रवये नमः, 3. ॐ सूर्याय नमः, 4.ॐ भानवे नमः, 5.ॐ खगाय नमः, 6. ॐ पूष्णे नमः,7. ॐ हिरण्यगर्भाय नमः, 8. ॐ मरीचये नमः, 9. ॐ आदित्याय नमः, 10.ॐ सवित्रे नमः, 11. ॐ अर्काय नमः, 12. ॐ भास्कराय नमः, 13. ॐ सवितृ सूर्यनारायणाय नमः